रेड लाइट एरिया से पहली हीरोइन ढूंढने गए थे दादा साहब फाल्के, जानें जिंदगी से जुड़े 7 सच

बॉलीवुड में फिल्मों की शुरुआत करने वाले दादा साहब की आज 148वीं बर्थ एनिवर्सरी है। दादा साहब ने न केवल फिल्म इंडस्ट्री की नींव रखी बल्कि बॉलीवुड को पहली हिंदी फिल्म भी दी जिसे लोग आज भी याद करते है। 19 साल के फिल्मी सफर में दादा साहब फाल्के ने 121 फिल्में बनाई जिसमें 26 …

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भोजपुरी सिनेमा की शुरुआत श्याम श्वेत फिल्म से…

फिल्मों में भोजपुरी का आगमन यूं तो 1932 में बनी दूसरी बोलती फिल्म इंदरसभा से हो गया था। सांगीतिक फिल्म होने के नाते उसमें 72 गाने रखे गए थे। जिनमें दो भोजपुरी के थे। हम आज भी इस फिल्म के गीत ‘सुरतिया दिखाय जाओ ओ बाँके छैला’ और ‘ठाढ़े हूँ तोरे द्वार, बुलाले मोरे साजन …

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पॉलीवुड सिनेमा (भोजपुरी फिल्म) में 26 फरवरी का दिन महत्वपूर्ण क्यों है?

उतरः- 16 फरवरी 1962 को भोजपुरी भाषा की पहली फिल्म ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़ैबो’ का पटना के ऐतिहासिक शहीद स्मारक पर मुहूर्त संपन्न हुआ। चलिए अब पूर्वांचल फिल्म (पॉलीवुड सिनेमा) सफर में:- भोजपुरी सिनेमा १९६२ से शुरू हुई लेकिन भोजपुरिया छोक हिंदी फिल्मो में बहुत पहले से दिया जा रहा है जो आज तक …

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डा. राजेन्द्र प्रसाद

डा. राजेन्द्र प्रसाद भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति थे। उनका जीवन सार्वजनिक इतिहास है। वह सादगी, सेवा, त्याग और देशभक्ति के प्रतिमूर्ति थे। स्वतंत्रता आन्दोलन में अपने आपको पुरी तरह से होम कर देने वाले राजेन्द्र बाबू अत्यंत सरल और गम्भीर प्रकृति के व्यक्ति थे। वह सभी वर्ग के लोगो से सामान्य व्यवहार रखते थे। …

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भोजपुरी सिनेमा

भोजपुरी सिनेमा ने भले ही 5 दशक से ज्यादा का सफर पूरा कर लिया है लेकिन उसके खाते में 10-12 बेहतरीन फिल्में भी नहीं है। हर साल 50 से ज्यादा भोजपुरी फिल्में बन रही हैं लेकिन हिन्दी फिल्मों की अंधी नकल की वजह से वह न तो प्योर भोजपुरी रह पाती है और न ही …

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‘सर्व भाषा साहित्य उत्सव’

भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति पर काम काने वाली संस्था ‘सर्व भाषा ट्रस्ट’ द्वारा ‘सर्व भाषा साहित्य उत्सव’ आयोजन गांधी शांति प्रतिष्ठान में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मेहता ओ. पी. मोहन और नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ प्रोफेसर डाॅ. प्रसन्नांशु थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यास के अध्यक्ष व वरिष्ठ …

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बगीचे में आम के टिकोले चुनते हुए सीखे लोकगीत

पटनाः बिहार में छठ के पारंपरिक गीत हों या विवाह के मौके पर कानों में अक्सर सुनाई देने वाले गीत, इन गीतों का दूसरा नाम ही पद्मश्री शारदा सिन्हा कहा जाता है। शारदा कहती हैं कि बचपन में पटना में रहकर शिक्षा ले रही थी, स्कूल और कॉलेज के दिनों में गर्मी की छुट्टी होने …

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